महामहोपाध्याय हलायुध पूर्वी भारत (मुख्यतः बंगाल और मिथिला क्षेत्र) के सबसे प्रभावशाली विद्वानों और नीति-निर्माताओं में से एक थे।
राजदरबार में उच्च पद
ये सेन वंश के महान राजा लक्ष्मण सेन के दरबार में प्रधान मंत्री और धर्माधिकारी (Chief Justice / Head of Religious Affairs) थे। इनके पिता का नाम धनंजय था।
महान साहित्यिक रचनाएँ
इनकी सबसे प्रसिद्ध रचना 'ब्राह्मण सर्वस्व' है। इस ग्रंथ में ब्राह्मणों के दैनिक कर्मकांडों (जैसे स्नान, संध्या, तर्पण), वैदिक मंत्रों के सही उपयोग और उनके गहरे अर्थों का बहुत प्रामाणिक वर्णन किया गया है।
इसके अतिरिक्त इन्होने 'मीमांसा सर्वस्व', 'वैष्णव सर्वस्व', 'शैव सर्वस्व' और 'पंडित सर्वस्व' जैसे महान ग्रंथों की भी रचना की थी।
सांस्कृतिक प्रभाव
मिथिला और बंगाल के ब्राह्मणों के कर्मकांड, विवाह संस्कार और धर्मशास्त्रीय नियमों को व्यवस्थित करने में इनका बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। आज भी पारंपरिक अनुष्ठानों में इनके ग्रंथों का प्रमाण दिया जाता है।
मिथिला की वंशावली (पंजी व्यवस्था) से संबंध
यदि आप हलायुध को किसी विशेष 'मूलग्राम' या पंजी व्यवस्था की वंशावली (Genealogical Tree) के संदर्भ में देख रहे हैं, तो यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मिथिला के कई कुलीन ब्राह्मण वंशों की शुरुआत (बीज-पुरुष) के रूप में महामहोपाध्याय हलायुध जैसे विद्वानों का नाम दर्ज है। मिथिला में न्याय शास्त्र और मीमांसा पढ़ने वाले उच्च कोटि के नैयायिकों को म० म० की उपाधि से सम्मानित किया जाता था, और हलायुध का नाम उस बौद्धिक परंपरा के शिखर पर आता है।